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दुनिया की सबसे कोमल है ये पदार्थ, पोलर बियर के फर की तरह कई चीजों में किया जाएगा इस्तेमाल

फूलों की काली से भी हल्का और ठोस पदार्थ दुनिया में मौजूद है। इसका वजन फूल की कलियों से भी काम होता है और यह मटेरियल एरोजेल के नाम से जाना जाता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों इस जुड़ा एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। 

दुनिया का सबसे हल्का पदार्थ

एरोजेल एक अद्भुत मटेरियल है। यह अदभुत होने के साथ-साथ दुनिया का सबसे हल्का पदार्थ है जिसका घनत्व सबसे कम होता है। घनत्व कम होने के कारण यह एक फूल की काली से भी काफी हल्का होता है। यह बहुत कम पाया जाता है। परंतु इस पदार्थ की काफी अधिक खूबियां होती है, हाल ही में सोशल मीडिया में इसके कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन खूबियों को जानकर आप रह जाएंगे दंग और अब एरोजेल को लेकर कई उपयोग भी बताई जा रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे हैं वीडियो ने इसके बारे में कई प्रकार की जानकारियां शेयर की है। कहीं हम जानकारियां बताई गई है और उसके अलावा भी अपने शोध के द्वारा हम इसके विशेषताओं के बारे में आज चर्चा करने जा रहे हैं। हमारे पृथ्वी में इंसानों ने ऐसे पदार्थ को भी बना लिया है जिनके बारे में सुनने से ही इंसान दंग ही नहीं बढ़ के पैरों तले जमीन घसक जाएंगे।

क्या है एरोजेल में खास 

सरोजिनी इतना होता है कि यह हवा से 7 गुना हल्का है और स्टील से 10 गुना ज्यादा मजबूत है। यह पद्धति वैज्ञानिकों के खास पद्धति के द्वारा तैयार की गई है। ग्राफीन एरोजन के बारे में काफी कम लोग जानते हैं। परंतु यह दुनिया के सबसे हल्की वास्तु होने के साथ-साथ काफी मजबूत भी होती है। ग्राफीन एरोगेल एक ऐसा पदार्थ है जो की छिद्र युक्त कृत्रिम पदार्थ है जो जल से बनाया जाता है। इसके साथ ही इसमें किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ नहीं होता है।

इस पद्धति में अंदर गैस भरी हुई होती है और इसलिए अंदरूनी संरचना मजबूत होने के साथ-साथ काफी हल्का भी होता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जिसके अंदर बिजली अच्छे तरीके से प्रवाहित नहीं हो सकती है और इसका घनत्व भी बहुत कम होता है। हालांकि यहां कई प्रकार के नाम से भी जाना जाता है। सन 1931 में वैज्ञानिक सेमुअल के द्वारा इसे बनाया गया था। हालांकि यह है कृत्रिम पदार्थ है परंतु बहुत ही उपयोगी है।

कैसे बनाया जाता है दुनिया का सबसे हल्का पदार्थ

इस एरो जेल को बनाने के लिए सुपरक्रिटिकल ड्राइंग या फ्रीज ड्राइंग के माध्यम से बनाया जाता है। इन दोनों ही प्रक्रिया के अनुसार ग्राफीन के पहले अंदर से मौजूद तरल पदार्थ को बिल्कुल ही सुख लिया जाता है तत्पश्चात ग्राफीन एरोसॉल में परिवर्तित हो जाता है। हालांकि इसके बाद उसमें अंदर गैस भी प्रवेश कराया जाता है इसके बाद उसका अंदरूनी संरचना डरता नहीं है बल्कि ठोस बन जाता है। यह तो एरो जेल की खोज सन 1931 में ही हो गई थी परंतु आज भी इसके उपयोग के बारे में तरह-तरह के शोध जारी है। 

क्या है इसके विशेष इस्तेमाल

एरोजेल का विशेष इस्तेमाल प्रकार की चीजों में किया जाता है। इसके कई प्रकार के गुण रासायनिक तौर पर दिखाई देता है। एरोसॉल का मुख्य इस्तेमाल उच्च विसंवाहक गुड़ के कारण जिसे आमतौर पर विद्युत उपकरणों के लिए प्रयोग किया जाता है। क्योंकि इसके अंदर आसानी से बिजली का प्रवेश नहीं किया जा सकता। नासा के द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले बाण जल का उपयोग विद्युत संवाहक यानी कंडक्टर के तौर पर किया जाता है। इसका उपयोग मुख्यतः अंतरिक्ष नो में किया जाता है क्योंकि यह काफी हल्का होता है। साथ ही साथ इसका एक और इस्तेमाल स्पेस सूट में भी किया जाता है।

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