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भारत में दो साइबेरियन टाइगर लाए गए, रात में करते हैं शिकार, जानिए खास बातें

दुनिया के सबसे खूंखार टाइगर में से एक साइबेरियन टाइगर होता है। साइप्रस से दो साइबेरियन टाइगर्स को 25 घंटे की यात्रा के बाद भारत लाया गया। यह मुख्ता ठंडे इलाकों में पाए जाते हैं और उनके जबड़े एवं पंजे खतरनाक और मजबूत होते हैं। 

दार्जिलिंग ले गए साइबेरियन टाइगर

साइबेरिया नस्ल के दो टाइगर साइप्रस के पे फौज ज से पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पहुंच गए। यहां पर पद मजा नायडू हिमालयन जियोलॉजिकल पार्क में लाया गया है। इनमें से एक का नाम लारा और दूसरे का अकमस है। सन 2007 के बाद सभी साइबेरियन टाइगर को यहीं पर रखा गया है क्योंकि यह बहुत ही ऊंचाई पर स्थित है। ऊंचाई पर होने के कारण या साइबेरियन टाइगर के अनुकूल है। 

देशभर में टाइगरों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट टाइगर चलाया गया था। 9 अप्रैल 2023 को प्रोजेक्ट टाइगर के कुल 50 साल पूरे हो चुके हैं। पद्मजा हिमालयन जूलॉजिकल पार्क के निर्देश के अनुसार दोनों टाइगर अभी बिल्कुल ही स्वस्थ है। हालांकि दोनों टाइगरों को अभी अलग-अलग रखा गया है और एक महीने के बाद उन्हें पब्लिक को दिखाने का अवसर प्राप्त किया जाएगा।

siberian tiger 2

एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाए गए टाइगर

लारा और अकमस को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाया गया है। दोनों टाइगरों को भारत से दो लाल पांडा के बदले में साइप्रस के प्रोफेसर चिड़ियाघर से लाया गया है। हालांकि दोनों टाइगर अभी बिल्कुल ही स्वस्थ है और करीब 1 महीने के बाद ही उन्हें लोगों के बीच देखने के लिए लाया जाएगा।

25 घंटे की यात्रा करके दार्जिलिंग पहुंचे साइबेरियन टाइगर

दोनों टाइगरों को साइप्रस से पश्चिम बंगाल दार्जिलिंग तक लाने में गरीब 25 घंटे का समय लगा है। दोनों टाइगर्स को शनिवार को रात 10:15 इनकी 25 घंटे की जर्नी शुरू हुई थी और स्थानीय समय के मुताबिक शुक्रवार को 7:20 पर उन्हें साइप्रस के लड़ना का एयरपोर्ट से सुबह 1:20 दुबई पहुंचे और फिर यहां से अगले दिन दोपहर 1:14 भारत के लिए रवाना हुआ। लारा और अकमस को बंगाल के दार्जिलिंग के पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क में फिलहाल रखा गया है और यह खूबसूरत चिड़ियाघर भारत में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित चिड़ियाघरों में से एक है। 

12 साल बाद साइबेरियन टाइगर लाए गए

साइबेरियन टाइगर मुख्यतः रात में शिकार करते हैं। इनके नाखून और दांत आम टाइगर से थोड़े बेहतर होते हैं। यह आम टाइगर से कुछ अधिक खूंखार भी होते हैं। फिलहाल जूलॉजिकल पार्क का तापमान साइबेरियन टाइगर के लिए अनुकूल है इस कारण उन्हें यहां रखा गया है। साल 2007 से साइबेरियन टाइगर को यहीं पर रखा जा रहा है एवं 2011 में यह देश के आखिरी साइबेरियन टाइगर की मौत भी हो चुकी है। कई मशक्कत के बाद 12 साल बाद साइबेरियन टाइगर यहां ले गए हैं। 

साइबेरियन टाइगर की खास बातें

  1. साइबेरियन टाइगर मुख्ता ठंडे इलाकों में रहते हैं और इस कारण इनकी आबादी ज्यादातर पूर्वी रस, उत्तरी चीन और कोरिया में पाई जाती है। 
  2. शिकार करने के मामले में साइबेरियन टाइगर काफी खतरनाक होते हैं, अपनी बुक के लिए साइबेरियन टाइगर बड़े-बड़े जानवरों का शिकार भी कर लेते हैं जिनमें से खरगोश, हिरण और भालू शामिल है।
  3. आमतौर पर साइबेरियन टाइगर की ऊंचाई 250 से 396 सेंटीमीटर और मादा की ऊंचाई 167 से 182 सेंटीमीटर तक होती है। दिन की बात करें तो न का वजन 475 से 660 पाउंड और मादा का वजन 303 पाउंड तक होता है।
  4. साइबेरियन टाइगर की उम्र लगभग 10 से 15 वर्ष तक की ही होती है। अपने फॉर वाले स्क्रीन की वजह से इन्हें ठंडे इलाकों में रहने में काफी मदद मिलती है।  

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