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Mission Aditya L1 अंतिम और सबसे कठिन पड़ाव में पहुंचा, 5 जनवरी को पहुंचेगा अपने मंजिल पर

अपने मिशन की सबसे अंतिम और कठिन पद पर पहुंच चुका है मिशन आदित्य L1‌। जल्द ही पृथ्वी और सूर्य के बीच हेलो ऑर्बिट में एंट्री करने का कार्य शुरू हो जाएगा। लगभग 5 जनवरी यानी आज से करीब 7 से 8 दिन के अंदर ही यह अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। इसकी दूरी पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर होगी।

7 से 8 दिनों में आदित्य L1 पहुंचेगा लक्ष्य पर

बताया जा रहा है कि आदित्य L1 अपने सबसे अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। यह पॉइंट पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। पृथ्वी और सूर्य के बीच हेलो ऑर्बिट में एंट्री कर यह अपने लक्ष्य पर जाकर रुक जाएगा। बताया जा रहा है कि लगभग 5 जनवरी को यह अपने लक्ष्य पर पहुंचकर स्थिर हो जाएगा। 5 साल तक का एक ही पॉइंट पर यह स्थिर रहेगा और वहां से सूर्य का अध्ययन करेगा। करीब 7 से 8 दिनों में ही यह अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

लैगरेंज पॉइंट से करेगा सूर्य का अध्ययन

पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित लैगरेंज पॉइंट से सूर्य का अध्ययन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस पॉइंट पर एंट्री, इस मिशन का सबसे जटिल और मुश्किल कार्य होगा। यहां से सटीक नेविगेशन और कंट्रोल की आवश्यकता होगी जिससे वह अपने लक्ष्य को धारण कर पाएगा। यह पॉइंट सूर्य के अध्ययन के लिए सबसे सटीक माना जाता है। यहां से स्थिर रहकर सूर्य पर स्थिर नजर रखी जा सकती है और अध्ययन किया जा सकता है। इस पॉइंट पर पहुंचते ही सैटेलाइट का गुरुत्वाकर्षण बल बैलेंस हो जाएगा और वह वहां पर चक्कर लगाना शुरू कर देगा। 

5 साल तक पॉइंट पर स्थिर रहेगा 

लैगरेंज पॉइंट पर पहुंचने के बाद आदित्य L1‌ इस मिशन का सबसे बड़ा जटिल फेज होगा। इसरो प्रमुख ने बताया है कि जब आदित्य L1‌ अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा तो फिर हम एक बार फिर से इंजन को चालू कर देंगे। इंजन के चालू होते हैं यह आगे नहीं बढ़ पाएगा। जिससे यह अपने लक्ष्य बिंदु पर पहुंच जाएगा तो यहां से उसे पॉइंट के चारों तरफ चक्कर लगाएगा और वहीं पर स्थिर बना रहेगा। कहां जा रहा है कि यह अगले 5 वर्षों तक सूर्य में होने वाली विभिन्न प्रकार की घटनाओं का अध्ययन करेगा और पता लगाने में मदद करेगा।

सूर्य की स्थिति में अध्ययन करने से इसके द्वारा डाटा से सूर्य के अनसुलझे राशियों का पता लगाया जा सकेगा। इस पॉइंट पर भारत का पहला सेटेलाइट पहुंच पाएगा। हालांकि सूर्य के अध्ययन के लिए पहले भी हमने सेटेलाइट भेजे हैं परंतु यह सबसे निकट अध्ययन है। आदित्य L1‌ जल्द ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा और इसकी तारीख लगभग 5 जनवरी को बताई जा रही है। 

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क्या है लैगरेंज पॉइंट?

लैगरेंज पॉइंट का जन्म एक इटावाली फ्रेंच मैथमेटिशियन लैगरेंज के नाम पर रखा गया है। जिस कारण से बोलचाल की भाषा में l1 पॉइंट के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि ऐसे 5 पॉइंट पृथ्वी और सूर्य के बीच में मौजूद है जहां पर गुरुत्वाकर्षण बल पूरी तरह बैलेंस हो जाता है। इन पांच पॉइंट में से कुछ पॉइंट पर सैटेलाइट पहले ही भेज दिए गए हैं। इस पॉइंट में भेजने का कारण यह है कि पृथ्वी और सूर्य के बीच में ग्रहण अक्सर ही देखा गया है। सूर्य ग्रहण के कारण पृथ्वी के पास से स्टडी करना काफी मुश्किल था। ऐसे में इस जगह पर किसी ऑब्जेक्ट को रखा जाता है तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल काफी बैलेंस हो जाता है और वह आसानी से उसे पॉइंट के चारों तरफ चक्कर लगाना शुरू कर देता है।

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