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Places of Worship Act: अगर यह कानून बदल गया तो बदल जाएगा धार्मिक स्थलों का स्वरूप

90 के दशक में राम मंदिर से संबंधित कई दंगे हुए और कई कानून को पास किए गए। उन सभी दंगों को रोकने के लिए एक कानून लाया गया जिसका नाम था प्लेस आफ वरशिप एक्ट। बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने इस कानून को हाल ही में खत्म करने के बाद कही है। प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट को खत्म करने की मांग करते हुए उन्होंने राज्यसभा में कहा कि इस कानून को खत्म कर देना चाहिए। यह एक्टर सन 1991 में तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव के द्वारा लाया गया था। 

राम मंदिर आंदोलन के समय लाया गया था कानून

प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है।  राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद अब ज्ञानवापी मामले में अदालत के फैसले के बाद जब वहां शुरू हो चुकी है। बीजेपी के एक नेता ने इस कानून को खत्म करने की बात कही है। बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने सालों पुराने इस एक्ट को पूरी तरीके से खत्म करने की मांग कही है। लेकिन यह सवाल उठता है कि इस कानून में ऐसा क्या खास है जो इसे खत्म करने की बात कही जा रही है और इस बीच में क्यों लाया गया है।

क्या है प्लेसज आफ वरशिप एक्ट

प्लेसज ऑफ़ वरशिप एक्ट सन 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के द्वारा लेकर आया गया था। उसे वक्त देश में चल रहा है कि दंगों और राम मंदिर आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस कानून को बनाया था और पास भी कर दिया था। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 से बने किसी भी धार्मिक स्थल को दूसरे धार्मिक स्थल से नहीं बदला जा सकता है। इस कानून के बाद लगभग सभी देंगे कुछ हद तक शांत हुए थे और आंदोलन में थोड़ी धीमी गति आ गई थी। 

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जुर्माना और सजा का प्रावधान

 धार्मिक स्थान के छेड़छाड़ से संबंधित धार्मिक स्थल के छेड़छाड़ के लिए इसमें कैद और जमाने का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अनुसार अगर कोई शख्स से धार्मिक स्थान से छेड़छाड़ करता है तो उसे 3 साल की कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है।

वरशिप एक्ट क्यों बनाया गया था?

अयोध्या राम मंदिर के मामले में वरशिप एक्ट को अलग रख दिया गया था क्योंकि यह मामला देश के आजादी से पहले से चल रहा है। और इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि यह मामला आजादी के पहले का है इसलिए अदालत में इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। लिहाजा वरशिप एक्ट इससे अलग रखा गया और बाद में बनी सभी चीजों पर इसके लिए मान्य किया गया।

क्यों हो रही है इस एक्ट को खत्म करने की मांग?

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरनाथ सिंह यादव ने कानून को खत्म करने के बाद कही है। फरवरी माह के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में बजट के दौरान यह बात उन्होंने इस कानून को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग कर डाली है। हरनाथ ने कहा कि यह कानून संविधान के तहत सभी धर्म और समाज के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। और साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि यह पूर्णत असंवैधानिक है। किस प्रकार यदि इस कानून को पूर्णता प्रभाव से हटाया जाता है तो इसे लागू सभी प्रावधानों को निष्फल कर दिया जाएगा। अलग इस बात को लेकर अभी अधिक चर्चा देखे नहीं जा रही है।

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