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Red Sea Crisis: लाल सागर संकट से खतरे में है सैकड़ो करोड़ रुपए का व्यापार, जानिए क्या है पूरा मामला

ईरान के समर्थन में किया जा रहे हुती विद्रोह के कारण लाल सागर संकट की वजह से समुद्री जहाज को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस विद्रोह के कारण समुद्री जहाज पर हमले शुरू कर दिए गए हैं। होती विद्रोहियों का यमन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है जिस कारण लाल सागर से जुड़ा हम पश्चिमी तट भी शामिल है। 

क्या है लाल सागर संकट 

हूती विद्रोही के द्वारा किया जा रहा विद्रोह के कारण लाल सागर में खतरा पैदा हो चुका है। उनके द्वारा सामग्री जहाज पर हमले शुरू कर दिए गए हैं और उनके कब्जे में यमन का पश्चिमी तट भी शामिल है। यह पश्चिमी तट लाल सागर से जुड़ा हुआ है और होती विद्रोह हमास जैसे आतंक में भी समर्थन कर रहे हैं। जिस कारण हमले की चपेट में आ रहे अधिकतर जहाज इसराइल और इजरायली व्यापार से जुड़े हुए हैं। परंतु लाल सागर में उत्पन्न होने वाले खतरे की वजह से व्यापार में कई प्रकार के संकट पैदा हो चुके हैं। 

हूती विद्रोहियों जो कि हमले मैं हम आज का समर्थन कर रहे हैं, वे गज में इजराइल से जंग लड़ रहे हैं। अभी तक देखा गया है कि हमले में आने वाले अधिकतर इजरायली जहाज पर अटैक किया गया है। जिस कारण कई प्रकार के व्यापार प्रभावित हो रहे हैं।

क्या हो सकता है लाल सागर संकट का परिणाम

बढ़ेगा क्रूड ऑयल का दाम

यदि लाल सागर पर यह सिलसिला जारी रहेगा, तो क्रूड ऑयल के दाम काफी हद तक बढ़ सकते हैं। एनालिटिक्स का कहना है कि स्वेज नहर संकट के चलते क्रूड ऑयल के दाम एक बार फिर से बढ़ सकते हैं। पिछले कुछ दशकों में देखा गया है कि 6 से $8 प्रति बैरल क्रूड ऑयल के दाम वैसे ही बढ़ चुके हैं। अगर स्वेज नहर में आगे जाकर खतरा पैदा होता है तो फिर क्रूड ऑयल के दाम और भी बढ़ सकते हैं। 

इन्फ्लेशन का खतरा 

लगातार चल रहे युद्ध के कारण, इजराइल में व्यापार वैसे भी प्रभावित हो चुका है। लाल सागर आगे जाकर स्वेज नहर से मिलता है। जैसा की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा सुरेश नगर से होकर गुजरता है और लाल सागर बंद हो जाने के बाद यूरोप से एशिया या एशिया से यूरोप माल की आवाजाही या शिपिंग कंपनियों को बहुत ही लंबा मार्ग लेना पड़ सकता है। ऐसा होने पर व्यापार का एक बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। इससे न सिर्फ शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ेगी बल्कि पूरे दुनिया में महंगाई काफी तेजी से बढ़ सकती है। 

कोल इंपोर्ट पर असर पढ़ने की उम्मीद नहीं

हालांकि एनालिटिक्स का मानना यह है कि लाल सागर में यदि संकट अधिक होता है तो भी भारत के कोल इंपोर्ट पर किसी भी प्रकार की प्रभावित नहीं होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत अपना अधिकतर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से करता है जिनका स्वेज नहर से कोई वास्ता नहीं है। या फिर लाल सागर से इनका कोई भी संबंध नहीं है। भारत अपना 67 फ़ीसदी कोयला इन्हीं दो देशों से इंपोर्ट करता है। 

ग्लोबल लेवल हो सकता है प्रभावित

हूती विद्रोहियों के हमले बढ़ाने के कारण, ग्लोबल लेवल केयर इंपोर्ट एक्सपोर्ट में फर्क पड़ सकता है। यदि आगे जाकर खतरा बढ़ता है तो रुकावट आने की आशंका बढ़ जाएगी। इस तेल और दूसरी ज़रूरी चीज़ों पर काफी तेजी से असर पड़ेगा और उनके दाम काफी ऊपर जा सकते हैं। हालांकि ग्लोबल इकॉनमी की ग्रोथ में काफी अधिक चेंज देखने को नहीं मिलेंगे परंतु यह काफी सुस्त हो सकती है। यदि हमला अधिक समय तक चलता है, तो कई प्रकार की ग्लोबल लेवल पर उथल-पुथल देखी जा सकती है। हालांकि अभी इजरायल की तरफ से किसी भी प्रकार की जानकारी सामने नहीं आया है।

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