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Zobox Success Story: कैसे एक शख्स ने पुराने स्मार्टफोन से बना डाला 50 करोड़ का बिजनेस!

Zobox Success Story: भारत में स्टार्टअप्स का चलन बढ़ता जा रहा है। हर दिन नए-नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं और कई स्टार्टअप तो सफल भी हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल लाखों स्मार्टफोन बेकार हो जाते हैं? इन स्मार्टफोन को अगर ठीक करके बेच दिया जाए तो इससे काफी पैसा कमाया जा सकता है।

इसी बात को ध्यान में रखकर दिल्ली के रहने वाले Neeraj Chopra ने Zobox नाम की एक कंपनी शुरू की। Zobox पुराने स्मार्टफोन को खरीदकर उसे ठीक करके दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाती है और फिर उसे कम कीमत पर बेचती है।

Zobox की शुरुआत साल 2020 में हुई थी और आज यह कंपनी 50 करोड़ रुपए का कारोबार कर रही है। Neeraj Chopra की कहानी एक इन्स्परेशनल कहानी है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे मेहनत और लगन से कोई भी सफल हो सकता है।

आज के इस आर्टिकल में आप Zobox Success Story के बारे में पढ़ेंगे और जानेंगे कि Neeraj Chopra ने कैसे अपने इस बिजनेस को करोड़ों का बना डाला है।

Zobox Success Story Overview

कंपनी का नामZobox
संस्थापकनीरज चोपड़ा
स्थापना वर्ष2020
मुख्यालयदिल्ली, भारत
उत्पादरिफर्बिश्ड मोबाइल फोन
भविष्य– तेजी से बढ़ रही है
– 2023 में 75 करोड़ रुपये का कारोबार करने की उम्मीद
सफलता के प्रमुख कारक– भारत में रिफर्बिश्ड गैजेट्स की मांग को बढ़ावा देना 
– पर्यावरण की रक्षा में योगदान देना
भविष्य का परिदृश्य– भारत और विदेशों में विस्तार की संभावना
– नई तकनीकों और नवाचारों में निवेश
वर्तमान संचालन– हर दिन 20,000 से 25,000 मोबाइल फोन बेचती है
– भारत के 50 से अधिक शहरों में बिक्री और सेवा केंद्र संचालित करती है
वर्तमान कुल संपत्ति50 करोड़ रुपये से अधिक
वेबसाइटClick Here

Zobox का फाउंडर कौन हैं: Zobox Success Story

नीरज चोपड़ा भारत की सबसे बड़ी पुराने स्मार्टफोन रिफर्बिशिंग कंपनी Zobox के संस्थापक हैं, जिसका सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपए से अधिक है। लेकिन इस शिखर तक पहुंचने का उनका रास्ता उतना आसान नहीं था, आइए उनके इस संघर्ष और सफलता के सफर को करीब से देखें।

Neeraj Chopra Zobox Founder

का जन्म भारत के दिल्ली शहर में हुआ था। उनके दादाजी विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आए थे और पाकिस्तान में ही अपना सब कुछ छोड़कर उन्होंने यहां से अपने परिवार का सब कुछ नया बनाया था। नीरज के पिता हांगकांग (Hongkong) में एक्सपोर्ट इंपोर्ट का बिजनेस करते थे। 

18 साल की उम्र में ही पिता के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस के चलते नीरज हांगकांग चले गए। वहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की और पिता के ही बिजनेस में हाथ भी बंटाना शुरू किया। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 2012 में एक घटना ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया। उनके चाचा जी के निधन के बाद वो वापस भारत लौट आए।

भारत लौटकर नीरज ने पावर बैंकों की बढ़ती डिमांड को भुनाने का निर्णय लिया। हांगकांग से उन्हें इंपोर्ट कर भारत में बेचना शुरू किया। 5 साल तक उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स के इस कारोबार को सफलतापूर्वक चलाया। अनुभव लेकर 2020 में नीरज ने खुद की कंपनी बनाने का निर्णय किया और यहीं से उनके Zobox स्टार्टअप की शुरुआत होती है। 

नीरज को पुराने स्मार्टफोन के बिजनेस में संभावनाएं दिखाई दीं। उन्होंने सोचा कि पुराने स्मार्टफोन को रिफर्बिश करके बेचने से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

Zobox Success Story कैसे शुरू हुई?

Zobox Success Story

2020 का साल भारत के लिए चुनौतियों भरा था। कोरोनावायरस के प्रकोप से लॉकडाउन लगा हुआ था, हर तरफ आर्थिक मंदी का साया था। ऐसे में किसी का ये सोचना भी मुश्किल था कि इस समय पुराने स्मार्टफोन से जुड़ा बिजनेस सफल हो सकता है। लेकिन नीरज हार मानने वाले नहीं थे। उन्होंने Zobox की शुरुआत की, उस कंपनी जिसे पुराने स्मार्टफोन्स को नया जीवन देने का जिम्मा सौंपा गया था।

शुरुआत में कठिनाइयां कम नहीं थीं। लॉकडाउन के चलते लोग नए फोन खरीदने में भी कतरा रहे थे, पुराने बेचने का तो सवाल ही नहीं उठता था। लेकिन नीरज ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया, सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए और ग्राहकों को समझाया कि कैसे Zobox के रिफर्बिश किए गए फोन उम्दा क्वालिटी और किफायती कीमत का बेहतरीन मेल हैं।

धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जगा। पुराने को सस्ता और अच्छा मिल रहा था, तो क्यों न खरीदें? Zobox की बिक्री बढ़ने लगी। शुरुआती 100 फोन महीने बेचना भी मुश्किल था, आज हर महीने 20,000 से 25,000 पुराने फोन नए जीवन के साथ ग्राहकों तक पहुंचते हैं।

Zobox success story: एक सस्टेनेबल आइडिया

भारत में हर साल लाखों स्मार्टफोन बेचे जाते हैं। इनमें से कई फोन कुछ साल इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है। Zobox इसी समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा है। Zobox पुराने स्मार्टफोन को एक बार फिर नया बनाकर बाजार में बेचता है, जिससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिलती है।

Zobox की सफलता के पीछे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

  1. नीरज का entrepreneurial दृष्टिकोण और जुनून: नीरज के अंदर हमेशा कुछ नया करने की प्रबल इच्छा थी। वो असफलताओं से नहीं घबराए, बल्कि लगातार कोशिश करते रहे और अपने जुनून से Zobox को मंजिल तक पहुंचाया।
  2. बढ़ती मांग: भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साथ ही पर्यावरण को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है, जिससे Zobox जैसे सस्टेनेबल बिजनेस को बढ़ावा मिला।
  3. गुणवत्ता और ग्राहक सेवा: Zobox रिफर्बिश किए गए फोन पर भी वारंटी देती है, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है।
  4. सस्टेनेबल आइडिया: Zobox की सफलता का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि यह एक सस्टेनेबल आइडिया है। पुराने स्मार्टफोन को रिफर्बिश करके बेचना न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह ग्राहकों को भी सस्ती और अच्छी क्वालिटी वाले फोन खरीदने का मौका देता है।

Zobox की भविष्य की योजनाएं

Zobox अपने विस्तार की योजना बना रही है। कंपनी भारत के सभी प्रमुख शहरों में अपनी शाखाओं का विस्तार करना चाहती है। इसके अलावा, कंपनी नए-नए डिजिटल प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।

Zobox Success Story

Zobox Success Story एक इंस्पिरेशनल स्टोरी है। यह स्टोरी बताती है कि सपने देखने और उनके लिए मेहनत करने से कुछ भी असंभव नहीं है। Neeraj Chopra की कहानी से हम सभी को प्रेरणा मिलती है कि हमें भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

Zobox Net Revenue 2023: Zobox Success Story

कोरोना काल में शुरू हुई Zobox कंपनी आज करोड़ों की बन चुकी है। एक समय ऐसा था जब नीरज इस कंपनी के द्वारा सिर्फ मुश्किल से कुछ ही मोबाइल बेच पाते थे। पर आज के समय में हर दिन उनके 20 हजार से 25,000 मोबाइल आसानी से बिक जाते हैं। इसके अलावा नीरज ने दिल्ली के करोलबाग में एक छोटा स्पेस भी बनवाया हुआ है जहां पर इनकी टीम मोबाइल रिपेयरिंग भी करती हैं।

वहीं अगर अभी हम इस कंपनी के टर्नओवर की बात करें तो इस समय Zobox कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिसके कारण यह कंपनी करोड़ों की बन चुकी है।

Zobox की सफलता के पीछे कई कारक हैं, लेकिन इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारक है कंपनी का नेट रेवेन्यू। Zobox कंपनी के रिफर्बिश किए गए फोन की कीमत नए फोन की तुलना में काफी कम होती है। इसके अलावा कंपनी अपने ग्राहकों को वारंटी भी देती है, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है।

Zobox कंपनी का नेट रेवेन्यू साल दर साल बढ़ रहा है। साल 2022 में कंपनी का नेट रेवेन्यू 50 करोड़ रुपए से अधिक होने की उम्मीद है। Zobox Success Story एक प्रेरणादायक कहानी है।

Zobox Success Story Interview

Conclusion 

नीरज ने अपने बिजनेस को शुरू करने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनकी कंपनी Zobox भारत की सबसे सफल रिफर्बिश्ड मोबाइल कंपनी बन चुकी है। 

Zobox Success Story से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए और इंसान की सोच बड़ी और सकारात्मक होनी चाहिए। हमें उम्मीद है कि इस आर्टिकल की मदद से आपको Zobox Success Story के बारे में जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारी हमारे बिजनेस पेज से जुड़े रहें।

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